"ईद ए मिलाद मनाना हक़ हैं. 0⃣4⃣

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*🥀 "ईद ए मिलाद मनाना हक़ हैं. 🥀*



*पोस्ट नंबर 4*

 निसार तेरी चहल पहल पर 
 हज़ार इदे रबी उल अव्वल
 सिवा ए इबलीस के जहाँ मे 
 सभी तो खुशिया मना रहे है.

फरमाने खुदा

(सुरे युनुस आयत 58)   

  अल्लाह ही के फ़ज़ल और
 उसी की रहमत और 
उसी पर चाहिए की खुशी करे

(सुरे अंबिया आयत 107)     

ए हबीब हमने तुमको सारे 
आलम 
की रहमत बना कर भेजा

(सुरे वददूहा आयत 11)           
 अपने रब की नेमतों का 
खूब खूब चर्चा करो  

(सुरे माएद आयत 114)  

कहा ईसा इबने ए मरियम ने: ए अल्लाह 
ए हमारे रब हम पर आसमान से 
एक कुआ उतार के वो (कुआ उतरने का दिन) 
हमारे लिए ईद हो, हमारे 
अग्लों और पिछलों की.

सुरे () “वरा फ़ाना लका
 ज़िकरक”

हमने नबी का ज़िक्र बुलंद 
कर दिया

(सुरे इब्राहिम सफ़ा 6)    
ए मूसा, याद दिलाओ उनको 
अल्लाह के दिनो की.

(सुरे आहज़ाब 6 )     

 ये नबी (हमारे) मुसलमानों का उनकी 
जान से ज़्यादा मालिक है 
और उनकी बीवियाँ उनकी
 माए है.
(सुरे अल-इमरान, आयत 164)       

हमने मोमिनो पर एह्सान किया,
 की जब उनमे अपने 
रसूल सल्लाहो आलैहे 
वसल्लम को भेज दिया 

(सुरे इब्राहिम: 7 )  
और याद करो जब तुम्हारे रब
 ने सुना दिया के अगर एहसान
 मानोगे तो मे तुम्हे और दूँगा, 
और ना-शुक्रि करो तो मेरा
 अज़ाब सख़्त है.
 
[सुरे बक़रा आयत 154 ]

और जो खुदा की राह मे मारे 
जाए उन्हे मुर्दा ना कहो 
बलके वो ज़िन्दा हैं , हाँ तुम्हे
 खबर नही.

ईज़ा ज़ुकीरतु ज़ुकीरता मई.

ए महबूब जहा जहा मेरा ज़िक्र होगा वाहा तेरा ज़िक्र होगा.

[ क़ूर'आन 33:56 ] 

अल्लाह और उसके फरिश्ते 
सरकार पर दरूद भेजते हैं 
मोमिनो तुम भी इन पर दरूद
 भेजो और खूब सलाम भेजा
 करो

 (सुरे तौबा 168)

 "बिल मोमिनिना राउफ़ूर रहीम".                      

मेरा मुस्ताफे मेरे बन्दो पर
 राउफूररहीम हैं  

 (सुरे निसा:65 ) 
तो ए महबूब (सल्लाहो आलैहे वसल्लम) तुम्हारे रब की 
कसम ! वो मुसलमान ना होंगे 
जब तक अपने आपस के 
झगड़े मे तुम्हे हाक़िम ना बनाए

(सुरे हुजुरात (परा-26, रुकु-13) : आयात 2 )  
ए ईमान वालो, अपनी आवाज़ें 
उँची ना करो उस गैब बतानेवाले(नबी) की आवाज़ 
से और उनके हुज़ूर बात 
चिल्लाकर ना कहो जैसे आपस
 मे एक दूसरे के सामने 
चिल्लाते हो के कही तुम्हारे 
अमल अकारत ना हो जाएँ 
और तुम्हे खबर ना हो.

क़ुरआन शरीफ की इन आयतो 
को समझे तो पता चला की 
अल्लाह ने अपने नूर को 
बशरी लिबास मे सारे आलम 
के लिए रहमत बना कर भेजा. 
मोमिनो पर अहसान किया
 (वरना ये उम्मत भी हलाक 
कर दी जाती अपने गुनाहो की 
वजह से जैसे पिछली उम्मते 
कर दी गई). अल्लाह ने अपने 
हबीब का ज़िक्र बुलंद किया 
और दारूद ओ सलाम के 
ज़रिए किया. हम बन्दो को
 चाहिए की अल्लाह की 
इता'अत करे और नबी का 
ज़िक्र ख़ुशी से करे. पानी 
का कुआँ आसमान से उतरने
 पर हज़रते मूसा के अग्लो 
और पिछलो की ईद हुई, तो
 नबी के आमद पर ईद क्यू 
नही ? विलादत ए आदम पर 
“ईद ए ज़ूमा” है तो विलादत
 ए मुस्तफ़ा पर ईद ए मीलाद 
क्यू नही ?

लफ़ज़े “मुहम्मद” के माना.

वो हस्ती जिसकी बहोत ज़्यादा 
तारीफ की जाए.

 (या अल्लाह तू बेहतर जानता
 हैं 
तेरा कौल हक़ है. आज लोग 
नबी के ज़िक्र को कम करने 
की हज़ारो कोशिश करते हैं,
 लेकिन बस नबी का नाम ले 
लिया तो उनकी तारीफ़ बयान 
हो गई... सुबहन अल्लाह)

नबी का फर्श पर नाम मुहम्मद 
और अर्श का नाम अहमद

दोनो नामो का पहला हर्फ 
निकाल दो तो एक ही माना 
होता हैं "हम्द" मिलाद का सबूत हदीसो से           

 हुज़ूर के ज़माने मे मस्जिद-
ए-नब्वी मे मिलाद हुई इसमे 
खुद हुज़ूर सल्लाहो आलैहे 
वसल्लम ने

अपनी विलादत के फ़ज़ाएल 
बयान किए.
(तीरमिज़ी शरीफ, जिल्द 2 
सफ़ा 201)

खुद ' नबी-ए-पाक सल्लाहो 
आलैहे वसल्लम ने अपने 
मिलाद पर अल्लाह का शुक्र 
बजा लाने की तलकीन फरमाई
 और तरगीब दी....!! (मुस्लिम शरीफ, जिल्द - 2, सफ़ा –
 819) (नीसाई शरीफ, जिल्द 
-2 सफ़ा–147)

(बैहक़ि शरीफ, जिल्द - 4, 
सफ़ा – 286)

हज़रत अबू क़तादा ऱदिआल्लह 
अनहू से रिवायत है रसूल-ए-
करीम सल्लाहो आलैहे 
वसल्लम से पिर का रोज़ा 
रखने के बारे मे 
सवाल किया गया तो आप 
सल्लाहो आलैहे वसल्लम ने 
फरमाया क इसी दिन मेरी 
विलादत हुई और इसी दिन 
मुझ पर क़ुरान नज़िल हुआ"

(सही मुस्लिम जिल्द 2 हदीस
 819 सफ़ा 1162) (नसई 
अल सुनने कुबरा जिल्द 2 
हदीस 146 सफ़ा 2777)

अल्लाह को पसंद हैं जो बन्दो 
को नेमत मिले उसका इज़हार 
करो. (तीरमिज़ी शरीफ 2819
 हदीस ए हसन)

पीर के रोज अबू लहब के 
उंगली से पानी निकलता है 
जो उसे सुकून पहोचाता है 
जहन्नम की तकलीफ़ से.

वजह ?? नबी के विलादत 
की खबर सुनाने के सबब
 उसने अपनी लोंड़ी शोएबा 
को उंगली के इशारे से आज़ाद
 किया था.         
(सही बुखारी, बाब 1 सफ़ा 
153 हदीस 5101)

मो’अमीनो के लिए अल्लाह 
ने जुमा को ईद बना दिया ??

नबी ने फरमाया अल्लाह ने 
जुमा को हज़रते आदम 
अलैहिस्सलाम को पैदा किया, 
इसी दिन ज़मीन पर उन्हे 
उतरा 
और इसी दिन उन्हे वफात दी. 
 [सुनन इबने माज़ा, जिल्द 2,
 सफ़ा 8, हदीस 1084]

      मिलाद (विलादत का 
अरबी माना) को ईद ए मिलाद
 कहने का सबूत 

             ईद का अरबी माना 
खुशी का हैं

(सुरे माएद आयत 114)

   जिस दिन अल्लाह की खास 
ऱहेमत नाज़िल हो उस दिन को 
ईद मनाना और खुशी मनाना 
अल्लाह का शुक्र अदा करना 
अंबिया का तरीका है

जब आका सल्लाहो आलैहे 
वसल्लम हिजरत कर के मदीना 
शरीफ आए तो लोगों ने खूब 
ज़शन मनाया

नोजवान लड़के अपनी छतो 
पर चढ़कर और गुलाम, खुद्दाम
 रास्तो मे फिरते थे और नारा 
ए रिसालत लगते और कहते 
या रसूल अल्लाह.

(सही मुस्लिम जिल्द 2 सफ़ा 
419)

हुज़ूर सल्लाहो आलैहे वसल्लम 
हज़रत हस्सान रज़ी अल्लाह 
अनहो के लिए मस्जिद ए नबवी
 शरीफ मे मिमबर रखते और हज़रत हस्सान उस पर खड़े 
हो कर हुज़ूर की शान ए 
अक़्दस मे नातिअ आशार 
पढ़ते थे ओर हुज़ूर फरमाते:
 जब तक हस्सान मेरे बारे मे 
नातिअ ओर फखरिया आशार 
पढ़ता रहेगा तो बेशक अल्लाह 
ताला रूहुल अक़्दस (हज़रत जिबराईल अलेह्सलाम) के 
ज़रिए हस्सान की मदद 
फरमाता है

(सुनन अबू दाऊद,किताब उल 
अदब, बाब मा जौ फ़ि'शर, 
जिल्द 5 पेज 176 हॅडाइत 
नो 5015)

(सुनन तीरमिज़ी, किताब उल 
अदब,बाब मा जौ फ़ि
 इंशाद'शर, जिल्द 3 पेज 
562,561 हदीस नो 2846)

चारो खलीफा का इमान ईद ए 
मिलाद पर                   
                                                    (अन नेमतुल कुबरा अलल आलम, सफ़ा 7 से 12)

हज़रत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर रदीअल्लाहू ता'आला अन्हु ने 
फरमाया के जिसने नबी 
करीम अलैहिस्सलाम के 
मिलाद पाक पर 1 दिरहम 
भी खर्च किया वो जन्नत मे 
मेरे साथ होगा.

हज़रत-ए-उमर फ़ारूक़-ए-आज़म रादियल्लाहू ता'आला 
अन्हु ने फरमाया के जिसने
 इमामुल अंबिया सललाल्लाहू 
अलआहे वासल्लं के मिलाद
 पाक की ताज़ीम की उस ने 
इस्लाम को ज़िंदा किया.

हज़रत-ए-उस्मान ग़नी
 रादियल्लाहू ता'आला अन्हु 
ने फरमाया क जिसने
 सइयादुल अंबिया के मिलाद 
पर 1 दिरहम भी खर्च किया
 गोया के वो बद्र वा हुनान के 
जिहाद मे शरीक हुआ.

मौला-ए-क़ैनात हज़रत अली रादियल्लाहू ता'आला अन्हु 
फरमाते है जो कोई मिलाद
 उन नबी सललाल्लाहो
 ता'आला अलहिए वासल्ल
ं की ता'अज़ीम और उस पेर
 खर्च करे वो दुनिया से ईमान 
क साथ जाएगा ओर बगैर 
हिसाब क जन्नत मे दाखिल
 होगा

मिलाद-ए-मुस्तफ़ा कैसे मनाए:

हज़रत शैख़ अब्दुल हक़्क
़ मुहद्दित देलवी 
(रदी अल्लाहू अन्हु) फरमाते
 हैं सदक़ा दे कर खुशिया 
मनाओ.

इमाम क़स्तलान
 (रदी अल्लाहू अन्हु) फरमाते 
हैं
 सदक़ा देकर खुशिया मनाओ,
 अच्छे अमल ज़्यादा करो.

(अरब मे तकरीबन 80-85
 साल पहले तक, जब एईद 
ए मीलद माई जाती थी, तो 
लोग
 जुलूस बनाकर मक्‍के की 
गैलयो से होकर हज़रते 
फतेमा के घर तक ज़िक्र करते 
जाते.)

जुलूस मे अमामा शरीफ पहने, 
की अमामा पहन ने से सवाब 
70 मर्तबा बढ़ा दिया जाता है

जुलूस मे फ़िज़ूल बातो के 
बजाए नबी पर दारूदो सलाम 
पढ़े की विलादत का दिन 
अफ़ज़ल हैं. पूरे महीने ज़्यादा 
इबादत करे और उनकी याद
 मे महफिले मिलाद सजाए,
 तिलावत ए क़ुरआन करे, 
फातेह दिलाए

हज़रते अली पे नज़दियो ने 
कुफ्र के फ़तवे लगाए, सबूत 
मिलने पर कुछ लोगो ने माना.
 जो बचे उनकी नस्ले आज 
भी शिर्क के फ़तवे देते फिरते हैं.

साहाबी सय्यदिना बिलाल बिन 
हरिस मुज़नी (रा) नबी की 
मज़ार पर अर्ज़ कर रहे हैं: 
ए अल्लाह के रसूल अपनी 
उम्मत के लिए बारिश तलब 
कीजिए तहकीक आपकी 
उम्मत हलाक होने को हैं

(फतुल बारी सही बुखारी 
जिल्द 2 इमाम शबूद्दिन 
इबने हज्र असकलानी की 
नकल)

अबू दाउद् सुनन नसाई, 
अबू माजा की रिवायत 
अबू हुरैरा, अबू दाऊद ने 
रिवायत की.
कोई भी मुसलमान मुझपर 
सलाम भेजता हैं, मे खुद जवाब
 देता हू.

अबू दर्दा से रिवायत. 

इस्लाम के रूक्न और अल्लाह
 की इबादत.

इमान: अल्लाह का एक होने 
और नबी की रिसालत का 
मानना. अगर दोनो बतो मे 
से एक का भी इनकार करे, 
काफिर हो जाओगे.

नमाज़: सब से अफ़ज़ल 
इबादत, क़ुरआन मे 700
 मर्तबा नमाज़ पढ़ने का ज़िक्र
 आया, कैसे पढ़े एक भी 
मर्तबा नही. ये तो बस नबी 
करीम ने बताया. अल्लाह 
बेहतर जनता हैं उसने नबी 
से क्यू कहलवाया.    
रोज़ा: अल्लाह की सुन्नत 
और नबी की इता-अत.
हज्ज: अल्लाह का ज़िक्र, 
पैगंबरो के तरीके को याद 
करके ज़िंदा रखना. 
ज़कात: अल्लाह के बन्दो 
की मदद. 
 या मौला, तेरी इबादत मे 
तो नबी और पैगंबारो की 
यादें, तरीका और गुनहगार बंदे 
शामिल हैं.
शिर्क का फ़तवा देने वालों,,, 
क्या ये शर्क हैं ?
 फातेह का सबूत गैर 
मुकल्लिदीन की किताबो से

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