मत करो ऐसा मीलाद! 1⃣3⃣
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*🥀 मत करो ऐसा मीलाद! 🥀*
*पोस्ट नंबर 13*
✏️ इस बात से किसी को इख़्तिलाफ़ नहीं होना चाहिए के नबी -ए- करीम ﷺ की विलादत की ख़ुशिया मनाना एक मुस्तहसन व मुस्तहब अमल है लेकिन आज कुछ लोगों ने मीलाद मनाने का जो तरीक़ा अपनाया है वो क़ाबिल -ए- मलामत है।
जुलूस-ए-मुहम्मदी में गाने बजाकर नाचना, औरतो का बे पर्दा जुलूस को देखने के लिए घरों से बाहर निकलना, लाउडस्पीकर्स में रिमिक्स बजा कर लोगों को तकलीफ पहुचाना और हुक़ूकुल इबाद की परवा किये बगैर अपनी धुन में मस्त रहना हरगिज़ इस्लामी तरीक़ा नहीं और शरीअत में इसकी सख़्त मुमान'अत है।
वैसे तो कई बातें है इस दिल में बताने को, फिलहाल खुद के साथ पेश आने वाला एक वाकिया बताता हूं।
हमारे मोहल्ले के नौजवानों ने मीलाद के नाम पर चंदा किया, गाड़ी किराये पर ली और उस पर कई बड़े-बड़े लाउडस्पीकर्स बांध दिए! ये काम 12 रबीउल अव्वल की रात को ही कर लिया गया ताकि सुबह जुलूस मे शामिल होकर धूम मचायी जा सके लाउडस्पीकर्स से लदी गाड़ी को मेरे घर के बगल एक मैदान मे खड़ा करके पूरी आवाज मे बजाना शुरु कर दिया गया जिससे पूरे मोहल्ले की नीन्द हराम हो गयी।
मैने तक़रीबन रात 10 बजे से 11 बजे तक बर्दाश्त किया और ये सोचकर करवटें बदलता रहा कि शायद ये लोग अब बंद कर देगे लेकिन जब उम्मीद बाकी ना रही और सर से पानी उपर हो गया तो मै अपने घर से बाहर निकला और उन नौजवानो के पास गया
मैने उनसे कहा कि "आज आप लोग हमें सोने दीजियेगा?" तो उनमे से किसी ने कोई जवाब ना दिया, फिर मैने कहा कि आवाज इतनी ज़्यादा है कि मेरे घर मे गूंज रही है जिसकी वजह से घर के लोगों को तक़्लीफ हो रही है लिहाजा आप लोग आवाज को कम कर लें।
उन्होने मेरी इस दरख्वास्त को सुनकर भी अनसुना कर दिया और मुझे मायूस होकर वापस आना पड़ा।
जब मै घर पहुचा तो मुझे लगा कि शायद अब वो लोग इसे बंद कर देगे लेकिन हुआ ये कि उन्होने आवाज और बढ़ा दी!
उन्होने ऐसे रिमिक्स बजाना शुरु कर दिये जिसकी धमक से घर के बर्तन हिलने लगे!
रात 2 बजे तक घर का हर फर्द जागा हुआ था और मै अपनी तक़्लीफ को क़लम से बयान कर रहा था जिसके नतीजे में ये तहरीर आपके सामने पेश है।
एक तरफ मीलाद मनाकर ये दिखाना कि हम हुजूर ﷺ के गुलाम है और दूसरी तरफ उनकी तालीमात के खिलाफ अमल करना कैसा इश्क़ है?
अगर इस तरीके से मीलाद मनाना है तो मत करो ऐसा मीलाद! ऐसा मीलाद मनाना जिससे मुसलमानो को तक़्लीफ पहुचे उससे बेहतर है कि मत करो ऐसा मीलाद! जिस जुलूस में तम्हें बा वुज़ू होना चाहिये था, अगर उसमे तुम नशे मे नाचते रहे तो हम फिर कहेगे कि मत करो ऐसा मीलाद! जहाँ दुरूदो सलाम की सदाएँ बुलन्द होनी चाहिये थी वहाँ अगर ढोल बाजे बज रहे हैं तो मै ठीक कहता हूँ कि मत करो ऐसा मीलाद!
काश कि उतर जाये तेरे दिल में मेरी बात
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*🏁मसलके आला हजरत 🔴*
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