मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद शरीअत की रौशनी में*
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🥀 *12 रबि उल अव्वल* 🥀
*🅿🄾🅂🅃►10*
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♥️ *मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद शरीअत की रौशनी में*
🌹👉🏻 आक़ा ﷺ ने फ़रमाया : जुमुआ का दिन सब दिनों का सरदार है, अल्लाह عزوجل के नज़्दीक सबसे बड़ा है और वो अल्लाह عزوجل के नज़्दीक “ईदुल अज़्हा” और ” ईदुल फ़ित्र” से बड़ा है।
💎👉🏻 अल्लाह عزوجل ने इसमें (यानि जुमुआ के दिन) हज़रते आदम को पैदा किया
इसी में ज़मीन पर उनको उतरा
इसी में उनको वफ़ात दी,,✍
*🇨🇨 सुनन इब्ने माजाह, 1/8 हदिष 1084
📚👉🏻 इस हदिस में 3 खसल्ते हज़रत आदम के लिये बयान की गई जिसमे आप की वफ़ात ए ज़ाहिरी का भी ज़िक्र है। तो पता चला की एक नबी की पैदाइश उनका ज़मीन पर उतारना और उनकी वफ़ात के दिन के बावुजूद भी मोमिन के लिये अल्लाह ने उसे ईद बना दिया।
💎👉🏻 और तो और वो “ईदुल अज़्हा” और ” ईदुल फ़ित्र” से भी अफ़्ज़ल कर दिया।
🌹👉🏻मेराज की रात आक़ा ﷺ ने तमाम अम्बिया की इमामत की थी। जैसा की हदिस से पता चलता है की हमारे सरकार ﷺ तमाम अम्बिया के सरदार और इमाम है उनकी तशरीफ़ आवरी पर हम उस दिन को क्यू ईद न कहे। बल्कि हम तो उसे इदो की ईद कहेंगे की उनकी तशरीफ़ आवरी की वजह से ही तो हमें बाकि ईद मिली और हर हफ्ते में एक दिन करके पुरे साल में 52 इदो (जुमुआ) का तोहफा मिला इसी “राहमतुल्लिल आ’लमिन” की तशरीफ़ आवरी से मिला हैं तो हम क्यू उस दिन ख़ुशी न मनाये,
*⚖️ पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…*
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